कोई लड़े हिन्दू बन, मुस्लिम बने कोई लड़े,
छत्रिय,वैश्य, ब्रह्मिन और शुद्र आपस में भिड़े,
कोई कहे में उत्तरी,कोई कहे में दक्छ्नी,
मेरे लाल तुझको आपस में, लड़ने की आखिर क्या पड़ी!
गाँधी सुभाष आज़ाद ने, क्या सोचा कभी ये स्वप्न में,
जिस मां के लिए वो लड़े, अस्तित्वा उसका खतरे पड़े
आओ अब सब वचन दे, भारत माता के वास्ते
न आगे कभी हम लड़े, चले एकता के रस्ते||
- bharat mata ki Jai
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1 comment:
Kya koob kaha hai.
I wish this was part of my Hindi curriculum when in school.. a good read!!
Thanks
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