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Saturday, August 9, 2008
Monday, August 4, 2008
Love Marriage: dilemma b/w DIL & DIMAG
दीवाना दिल धड़कता है,
किसी के प्यार मैं, लेकिन
मुआ दिमाग कहता है,
मत खेल धड़कन से,
कभी भी पिट सकता है,
और धड़कन रुक सकता है,
जिंदिगी रुक जायेगी,
अगर सुनेगा तू दिल की|
इंतजार कर माँ-बाप का,
धुंड लेंगे दिल धड़कने को,
दिल भी धड़का लेना,
मोहब्बत की पींगे बढा लेना,
और कुछ गलत हो जाये तो,
माँ बाप से दुखडा रो लेना,
लाये थे तुम ही इसको,
ऐसे कुछ नाराज़ हो लेना|
अगर सुनेगा तू दिल की,
और चडेगा सीधी इमोशन की,
संभल जा पछतायेगा,
नाराज़ हो भी न पायेगा,
दिल धडकना तो दूर,
ठीक से रो भी ना पायेगा,
जिंदिगी की बड़ी भूल
ऐसे कुछ पछता भी न पायेगा|
मैं तो मजाक कर रहा था,
कुछ ऐसे ही बक रहा था,
अगर तू प्यार करता है
और तेरा दिल धड़कता है,
मत सुन दिमाग की,
और बात मान तू दिल की,
माँ- बाप भी होंगे खुशी,
रहत उनको जो तुने दे दी||
किसी के प्यार मैं, लेकिन
मुआ दिमाग कहता है,
मत खेल धड़कन से,
कभी भी पिट सकता है,
और धड़कन रुक सकता है,
जिंदिगी रुक जायेगी,
अगर सुनेगा तू दिल की|
इंतजार कर माँ-बाप का,
धुंड लेंगे दिल धड़कने को,
दिल भी धड़का लेना,
मोहब्बत की पींगे बढा लेना,
और कुछ गलत हो जाये तो,
माँ बाप से दुखडा रो लेना,
लाये थे तुम ही इसको,
ऐसे कुछ नाराज़ हो लेना|
अगर सुनेगा तू दिल की,
और चडेगा सीधी इमोशन की,
संभल जा पछतायेगा,
नाराज़ हो भी न पायेगा,
दिल धडकना तो दूर,
ठीक से रो भी ना पायेगा,
जिंदिगी की बड़ी भूल
ऐसे कुछ पछता भी न पायेगा|
मैं तो मजाक कर रहा था,
कुछ ऐसे ही बक रहा था,
अगर तू प्यार करता है
और तेरा दिल धड़कता है,
मत सुन दिमाग की,
और बात मान तू दिल की,
माँ- बाप भी होंगे खुशी,
रहत उनको जो तुने दे दी||
Wednesday, July 23, 2008
भारत का प्रजातंत्र और हम लोग
संसद के गलियारों मैं मचा विश्वास मत का शोर,
देखा सारी दुनिया ने भारत मैं लोकतंत्र का जोर,
बिके सांसद, लगा के बोली, किया पार्टी द्रोह,
मूंछे तान खड़े हैं ऐसे मार लिया हो मोर|
राजनीती के बाज़ारों मैं जब बिकेंगे ऐसे चोर,
बोली लगेगी जब इनकी पच्चीस पच्चीस करोर,
हाहाकार मचा है , जनता सोचे नित रोज़,
चीख रहे हैं पापी जैसे चोर मचाये शोर||
समझ नहीं आता इनको, क्या भूल गए ये लोग,
की पकड़ खड़े हैं ये सब, भारत के भविष्य की डोर,
लगा रहे आरोप पढाकर नैतिकता का पाठ,
नहीं चाह रहे झांकना अपने गिरेबान की ओर|
कब तक देखोगे ये सब, अब तो आँखे खोल,
कहीं एक जून रोटी नहीं मिलती, कहीं लुट रहे एक करोर,
त्राहि त्राहि मची हुई है भारत मैं हर ओर,
क्यूँ नहीं आते आप ओर हम, हाथ को हाथ से जोड़||
देखा सारी दुनिया ने भारत मैं लोकतंत्र का जोर,
बिके सांसद, लगा के बोली, किया पार्टी द्रोह,
मूंछे तान खड़े हैं ऐसे मार लिया हो मोर|
राजनीती के बाज़ारों मैं जब बिकेंगे ऐसे चोर,
बोली लगेगी जब इनकी पच्चीस पच्चीस करोर,
हाहाकार मचा है , जनता सोचे नित रोज़,
चीख रहे हैं पापी जैसे चोर मचाये शोर||
समझ नहीं आता इनको, क्या भूल गए ये लोग,
की पकड़ खड़े हैं ये सब, भारत के भविष्य की डोर,
लगा रहे आरोप पढाकर नैतिकता का पाठ,
नहीं चाह रहे झांकना अपने गिरेबान की ओर|
कब तक देखोगे ये सब, अब तो आँखे खोल,
कहीं एक जून रोटी नहीं मिलती, कहीं लुट रहे एक करोर,
त्राहि त्राहि मची हुई है भारत मैं हर ओर,
क्यूँ नहीं आते आप ओर हम, हाथ को हाथ से जोड़||
Tuesday, April 22, 2008
youth of young india
Dear friends,
Here it goes my second blog (though bit late)
Recently I wrote one poem showing how a true young Indian think about his country and what he want.I hope you will like this poem.
अतीत से सीखकर वर्तमान सिंचता हूँ,
वर्तमान समझकर भविष्या सोचता हूँ,
भविष्या के ताने बाने मैं खुद को देखता हूँ,
आसमान की उँचाई छुते देखता हूँ!
सपनो की दुनिया से हक़ीकत देखता हूँ,
हक़ीकत के पन्ने पलटते देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं,
भविष्य देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
भीड़ से रास्ता बनाते देखता हूँ,
भारत को सिरमोर बनते देखता हूँ,
भारत विश्वा गुरु,ये सुनते देखता हूँ,
अमीरी ग़रीबी खाई पट्टते देखता हूँ!
खुशहाल समरध सभी हैं
भारत को विकसित देश देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं
भविष्य देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
सांप्रदायिकता, जातिवाद,छेत्रवाद,भरस्टाचार,
अपराध त्रस्त समाज को बदलते देखता हूँ,
ग़रीबी , बेरोज़गारी , अकाल , महामारी
समस्त समस्याओं का अंत देखता हूँ!
आदर्श भारत का सपना सजोए बैठा हूँ,
सपना हक़ीकत बनते देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं,
भविष्य देखता हूँ मैं भविष्य देखता हूँ!!
फिर वर्तमान मे वापस आता हूँ,
राजनीति का अपराधीकरण देखता हूँ,
भरस्टाचारी, अपराधी को सम्मानित
ईमानदार को घुटते देखता हूँ!
बड़े बड़े वायदे सुनता हूँ,
लेकिन किसान आत्महत्या करते देखता हूँ,
सपनो से अलग भारत का युवा हूँ मैं,
वर्तमान देखता हूँ ,मैं वर्तमान देखता हूँ!!
रिज़र्वेसन की राजनीति , ग़लत अर्थ समझते देखता हूँ,
जातिवाद सांप्रदायिकता से देश झुलसते देखता हूँ,
ग़रीबी की कालिख लपेटे
कुछ अलग सा भारत देखता हूँ!
किंचित लोगों की स्वार्थ साधना से
जनमानस का भविष्य अंधकार मैं देखता हूँ,
तड़पते भारत का युवा हुईं मैं
वर्तमान देखता हूँ मैं वर्तमान देखता हूँ!!
अनगिनत समस्याएँ, किंतु समाधान देखता हूँ,
लोगों के अपने से जज़्बात देखता हूँ,
समय आ गया समूह मैं आने का
जनमानस मैं जन्क्रन्ति लाने का!
सपनो से अलग भारत को
सपनों सा भारत बनाने का,
युवा भारत का युवा हूँ मैं
वर्तमान देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
Here it goes my second blog (though bit late)
Recently I wrote one poem showing how a true young Indian think about his country and what he want.I hope you will like this poem.
अतीत से सीखकर वर्तमान सिंचता हूँ,
वर्तमान समझकर भविष्या सोचता हूँ,
भविष्या के ताने बाने मैं खुद को देखता हूँ,
आसमान की उँचाई छुते देखता हूँ!
सपनो की दुनिया से हक़ीकत देखता हूँ,
हक़ीकत के पन्ने पलटते देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं,
भविष्य देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
भीड़ से रास्ता बनाते देखता हूँ,
भारत को सिरमोर बनते देखता हूँ,
भारत विश्वा गुरु,ये सुनते देखता हूँ,
अमीरी ग़रीबी खाई पट्टते देखता हूँ!
खुशहाल समरध सभी हैं
भारत को विकसित देश देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं
भविष्य देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
सांप्रदायिकता, जातिवाद,छेत्रवाद,भरस्टाचार,
अपराध त्रस्त समाज को बदलते देखता हूँ,
ग़रीबी , बेरोज़गारी , अकाल , महामारी
समस्त समस्याओं का अंत देखता हूँ!
आदर्श भारत का सपना सजोए बैठा हूँ,
सपना हक़ीकत बनते देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं,
भविष्य देखता हूँ मैं भविष्य देखता हूँ!!
फिर वर्तमान मे वापस आता हूँ,
राजनीति का अपराधीकरण देखता हूँ,
भरस्टाचारी, अपराधी को सम्मानित
ईमानदार को घुटते देखता हूँ!
बड़े बड़े वायदे सुनता हूँ,
लेकिन किसान आत्महत्या करते देखता हूँ,
सपनो से अलग भारत का युवा हूँ मैं,
वर्तमान देखता हूँ ,मैं वर्तमान देखता हूँ!!
रिज़र्वेसन की राजनीति , ग़लत अर्थ समझते देखता हूँ,
जातिवाद सांप्रदायिकता से देश झुलसते देखता हूँ,
ग़रीबी की कालिख लपेटे
कुछ अलग सा भारत देखता हूँ!
किंचित लोगों की स्वार्थ साधना से
जनमानस का भविष्य अंधकार मैं देखता हूँ,
तड़पते भारत का युवा हुईं मैं
वर्तमान देखता हूँ मैं वर्तमान देखता हूँ!!
अनगिनत समस्याएँ, किंतु समाधान देखता हूँ,
लोगों के अपने से जज़्बात देखता हूँ,
समय आ गया समूह मैं आने का
जनमानस मैं जन्क्रन्ति लाने का!
सपनो से अलग भारत को
सपनों सा भारत बनाने का,
युवा भारत का युवा हूँ मैं
वर्तमान देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
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