Wednesday, April 1, 2009

इलेक्शन, परिवर्तन का समय!!!!

देखो देखो इलेक्शन का त्यौहार आया,
पांच वर्ष के बाद बदलाव का पैगाम आया,
नेता लगे झाकने, किसकी पकड़े पूँछ,
कौन जिताए दुबारा, नहीं पाए ये सूझ|
लगा रहे हैं गडित जातिगत विज्ञानं का,
कैसे जीते विश्वास, मतदाता अज्ञान का,
चीख रहे हैं सभी दल, पढ़ा नैतिकता का पाठ,
लगा रहे हैं, जुगत कैसे पाए सत्ता का ठाठ||

ना कोई करे बातें देश और विकास की,
चारों तरफ है चर्चा जाति, धर्म , उन्माद की,
गठबंधन को तोड़, बने फिर से गठबंधन,
चुनाव बाद, बोले- बनायेंगे फिर से गठबंधन|
प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए मची मारामारी,
मीडिया भी करे चर्चा- कौन पड़े किस पर भारी,
ना कोई करे बात मतदाता क्या है चाहे,
ढूंढ़ मचाये फिरे पार्टी, कौन हमे जिताए||

दल बदलू नेता फिर हुए सक्रिय,
अभी जीतना है भैया, फिर होंगे निष्क्रिय,
बदल मुखोटा, बदल के चोला, गीत नए फिर गाए,
कल तक जिनकी जय करते थे, आज कहे फिर हाय|
अपराधी बने योग्य, देश चलाने वास्ते,
कानून से जो खेलते थे, क्या चलेंगे कानून के रास्ते?
सभी कहे प्रतिनिधित्वा युवा को, पर टिकेट न देने पाए,
मजबूरी देखो, अस्सी वर्षीया भी खुद को युवा बताएं||

कहने को तो बहुत है भैया, सब है आपको ज्ञान,
कुछ ऐसा करो कि लोग जाएँ फिर मान,
देखो, परखो, प्रत्याशी को, जो करे विकास कि बात,
हरा भगाओ नेताओ को, करें जाति धरम कि बात|
वोट डालने जरुर ही जाना, जन चेतना भी फैलाना है,
अच्छे नागरिक बने सांसद, कुछ ऐसे जुगत भिडाना है,
अब नहीं चेते, फिर पछताए,पांच साल कि बात गयी,
दोषारोपद फिर मत करना, जब बर्बादी शुरुआत हुई||

करे निवेदन 'पाठक' तुमसे, संभलो देश जवान के,
अज्ञानी फिर खेल ना पायें तुम जैसे विद्वान से,
दिखा दो ताकत फिर से तुम, मतदाता अधिकार की,
सोचने को मजबूर हो जाये, प्रजातंत्र सरकार भी|
उम्मीद के साथ अंत करता हूं,
कि परिवर्तन फिर आएगा,
इसी अंत के साथ,
नया अध्याय शुरू हो जायेगा||

-जय हिंद