Wednesday, July 23, 2008

भारत का प्रजातंत्र और हम लोग

संसद के गलियारों मैं मचा विश्वास मत का शोर,
देखा सारी दुनिया ने भारत मैं लोकतंत्र का जोर,
बिके सांसद, लगा के बोली, किया पार्टी द्रोह,
मूंछे तान खड़े हैं ऐसे मार लिया हो मोर|

राजनीती के बाज़ारों मैं जब बिकेंगे ऐसे चोर,
बोली लगेगी जब इनकी पच्चीस पच्चीस करोर,
हाहाकार मचा है , जनता सोचे नित रोज़,
चीख रहे हैं पापी जैसे चोर मचाये शोर||

समझ नहीं आता इनको, क्या भूल गए ये लोग,
की पकड़ खड़े हैं ये सब, भारत के भविष्य की डोर,
लगा रहे आरोप पढाकर नैतिकता का पाठ,
नहीं चाह रहे झांकना अपने गिरेबान की ओर|

कब तक देखोगे ये सब, अब तो आँखे खोल,
कहीं एक जून रोटी नहीं मिलती, कहीं लुट रहे एक करोर,
त्राहि त्राहि मची हुई है भारत मैं हर ओर,
क्यूँ नहीं आते आप ओर हम, हाथ को हाथ से जोड़||