Dear friends,
Here it goes my second blog (though bit late)
Recently I wrote one poem showing how a true young Indian think about his country and what he want.I hope you will like this poem.
अतीत से सीखकर वर्तमान सिंचता हूँ,
वर्तमान समझकर भविष्या सोचता हूँ,
भविष्या के ताने बाने मैं खुद को देखता हूँ,
आसमान की उँचाई छुते देखता हूँ!
सपनो की दुनिया से हक़ीकत देखता हूँ,
हक़ीकत के पन्ने पलटते देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं,
भविष्य देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
भीड़ से रास्ता बनाते देखता हूँ,
भारत को सिरमोर बनते देखता हूँ,
भारत विश्वा गुरु,ये सुनते देखता हूँ,
अमीरी ग़रीबी खाई पट्टते देखता हूँ!
खुशहाल समरध सभी हैं
भारत को विकसित देश देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं
भविष्य देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
सांप्रदायिकता, जातिवाद,छेत्रवाद,भरस्टाचार,
अपराध त्रस्त समाज को बदलते देखता हूँ,
ग़रीबी , बेरोज़गारी , अकाल , महामारी
समस्त समस्याओं का अंत देखता हूँ!
आदर्श भारत का सपना सजोए बैठा हूँ,
सपना हक़ीकत बनते देखता हूँ,
युवा भारत का युवा हूँ मैं,
भविष्य देखता हूँ मैं भविष्य देखता हूँ!!
फिर वर्तमान मे वापस आता हूँ,
राजनीति का अपराधीकरण देखता हूँ,
भरस्टाचारी, अपराधी को सम्मानित
ईमानदार को घुटते देखता हूँ!
बड़े बड़े वायदे सुनता हूँ,
लेकिन किसान आत्महत्या करते देखता हूँ,
सपनो से अलग भारत का युवा हूँ मैं,
वर्तमान देखता हूँ ,मैं वर्तमान देखता हूँ!!
रिज़र्वेसन की राजनीति , ग़लत अर्थ समझते देखता हूँ,
जातिवाद सांप्रदायिकता से देश झुलसते देखता हूँ,
ग़रीबी की कालिख लपेटे
कुछ अलग सा भारत देखता हूँ!
किंचित लोगों की स्वार्थ साधना से
जनमानस का भविष्य अंधकार मैं देखता हूँ,
तड़पते भारत का युवा हुईं मैं
वर्तमान देखता हूँ मैं वर्तमान देखता हूँ!!
अनगिनत समस्याएँ, किंतु समाधान देखता हूँ,
लोगों के अपने से जज़्बात देखता हूँ,
समय आ गया समूह मैं आने का
जनमानस मैं जन्क्रन्ति लाने का!
सपनो से अलग भारत को
सपनों सा भारत बनाने का,
युवा भारत का युवा हूँ मैं
वर्तमान देखता हूँ, मैं भविष्य देखता हूँ!!
Tuesday, April 22, 2008
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